पाप के विरुद्ध संग्राम के संकल्प के साथ आनंदमार्गियों ने मनाया नीलकंठ दिवस

विकास कुमार
गढ़वा । आनंदमार्ग प्रचारक संघ सोनपुरवा, गढ़वा मुख्यालय की ओर से गुरुवार को नीलकंठ दिवस श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आनंदमार्गी बंधुओं ने श्रद्धेय बाबा आनंदमूर्ति के निर्देशानुसार जरूरतमंद, भूखे-प्यासे लोगों के बीच भोजन वितरण कर सेवा का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम के तहत अस्पताल परिसर, रेलवे स्टेशन, हाट-बाजार तथा विभिन्न सार्वजनिक और घुमंतू क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों को स्वादिष्ट भोजन कराया गया। बताया गया कि प्रत्येक आनंदमार्गी परिवार इस दिन अपने घरों में डबल भोजन बनाकर अपने परिवार के अतिरिक्त लाचार और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराता है।

भुक्ति प्रधान धर्मेन्द्र देव ने कहा कि गुरुदेव का स्पष्ट निर्देश है कि यदि कोई पाप शक्ति दूसरों को कष्ट देती है तो उसका उत्तर तामसिक या राजसिक क्रोध से नहीं, बल्कि सात्विक क्रोध और सकारात्मक परिवर्तन के संकल्प से देना चाहिए। उन्होंने कहा कि “विष का जवाब अमृत से” देने की भावना के साथ यह दिवस मनाया जाता है।

ज्ञात हो कि 12 फरवरी 1973 को आनंदमार्ग के संस्थापक आनंदमूर्ति को पटना के बांकीपुर केंद्रीय कारा में कथित रूप से दवा के नाम पर विष दिए जाने की घटना हुई थी। इसके विरोध में उन्होंने तत्कालीन केंद्र सरकार को सूचना देते हुए अप्रैल 1973 से अन्न-जल त्याग कर उपवास आरंभ कर दिया। बताया जाता है कि सरकार द्वारा न्यायिक जांच की मांग स्वीकार नहीं की गई और उन्होंने अपना उपवास जारी रखा।

करीब 5 वर्ष 4 महीने 2 दिन के उपवास के बाद पटना हाईकोर्ट से झूठे हत्या मामले में बरी होने पर 2 अगस्त 1978 को वे जेल से रिहा हुए। तभी से आनंदमार्ग के अनुयायी प्रत्येक वर्ष 12 फरवरी को पाप शक्ति के विरुद्ध संग्राम और मानव सेवा का संकल्प लेते हुए नीलकंठ दिवस मनाते हैं। इस अवसर पर सेवा धर्म मिशन सचिव कैलाश दादा,रिलीफ सेक्रेटरी सुचित लाल दादा, कल्चर सेक्रेटरी गौतम देव सहित युवा सेवार्थी रोहित,अमन देव, सुधांशु देव एवं मनोज दादा उपस्थित रहे।



